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मध्यप्रदेश शासन पशुपालन विभाग के आदेश क्रमांक एफ-23/87/04/35, दिनाँक 19/10/2004 द्वारा मध्यप्रदेश गौपालन एवं संवर्धन बोर्ड को दिनाँक 08/10/2004 से राज्य में प्रभावशील घोषित किया। बोर्ड रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसाइटी में दिनाँक 15/07/2004 को पंजीकृत किया गया। बोर्ड के कृत्यों के संचालन हेतु राज्य स्तर पर जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समितियों का गठन किया गया व सभी 51 जिलों की समितियां भी पंजीकृत है। गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समितियां पंजीयन हेतु प्राप्त नवीन प्रकरणों का परीक्षण कर समिति की अनुशंसा के साथ मय समस्त दस्तावेजों के प्रकरण बोर्ड मे प्रस्तुत करती है तत्पश्चात बोर्ड द्वारा नवीन गौशालाओं का पंजीयन किया जाता है। बोर्ड द्वारा 31/08/2019 की स्थिती में प्रदेश की ......... गौशालाओं का पंजीयन किया जा चुका है जिनमे से 625 गौशालाएं क्रियाशील है व उनमे उपलब्ध गौवंश की संख्या लगभग 1,66,967 है।
दिनाँक 08/10/2004 से बोर्ड के गठन के पश्चात् मध्यप्रदेश गौपालन एवं संवर्धन बोर्ड की नियमावली(यथासंशोधित) के नियम 12(1) अनुसार गौशालाओं के सुदृढीकरण हेतु बुनयादी सुविधाएँ जैसे चारा, पानी, भूमि, शेड आदि के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करने का दायित्व जिला गौपालन समिति द्वारा निभाया जाता है।
जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समिति के कृत्यों के संचालन तथा गौशालाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु राशी मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मंडी बोर्ड) की कृषि अनुसन्धान एवं अधोसंरचना विकास निधि से मध्यप्रदेश गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड को उपलब्ध कराई जाती है।
गौशालाएं सामान्यतः धार्मिक, सामाजिक तथा स्वंयसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित की जाती है जहाँ वृद्ध, अशक्त, रोगी, बेसहारा, अनुत्पादक तथा न्यायालय/पुलिस कस्टडी द्वारा गौशालाओं को सौंपे गये गौवंशी पशुओं का रख रखाव तथा प्रबंधन किया जाता है।